समाज एवं संस्कृति

पुस्तकालय

जैन सिद्धांत भवन : जैन और जैनिज़्म से सम्बन्धित पुस्तकों एवं हस्त लिखित पांडुलिपियों का यहाँ बहुत ही समृद्ध संग्रह है .

नागरी प्रचारणी सभा : रमना मैदान के उत्तर-पूर्व कोने पर अवस्थित यह पुस्तकालय बहुत ही समृद्ध है. हर प्रकार कि पत्रिकाएँ, अख़बार एवं पुस्तके यहाँ उपलब्ध है.

बाल हिंदी पुस्तकालय : आरा टाउन स्कूल के पास अवस्थित यह पुस्तकालय भी बहुत समृद्ध है. हर प्रकार कि पत्रिकाएँ, अख़बार एवं पुस्तके यहाँ उपलब्ध है.

सिनेमा

भोजपुरी सिनेमा के दर्शक बहुत बड़े क्षेत्र मे फैले है. इस क्षेत्र से अनेक फ़िल्मी लोगों ने सिनेमा उद्योग मे अपना योगदान दिया है. विश्वानाथ शाहाबादी ने 1960 मे “गंगा मैया तोहे पियरी चढइबो “ सिनेमा बनाया जो आज के दौर मे भी उतना ही जिवंत है . जनार्दन सिन्हा ने आरा के कलाकार जय तिलक को बतौर नायक लेकर सिनेमा बनाया – पिया निरमोहिया . अशोक चंद और लाक्स्मन शाहाबादी ने मिलकर एक सिनेमा बनाया – गंगा किनारे मोरा गाँव – जिसका शीर्षक गीत आज भी खूब प्रचलित है. आरा के ही जय मोहन ने इस सिनेमा मे खलनायक के भूमिका निभाई. इसी प्रकार भोजपुर के अनेक कलाकारों ने आरा को भोजपुर सिनेमा का हौलीउड बना दिया है.

संगीत परंपरा

जिले मे संगीत कि परंपरा प्राचीन काल से ही काफी समृद्ध रही है और दिनों दिन और समृद्ध होती जा रही है. आरा के ही श्री लक्ष्मण शाहाबादी, प्रो0 रामनाथ पाठक और श्री अरविन्द किशन ने सिनेमा एवं संगीत मे अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है. आरा के ही सराफत अली ने उषा मंगेशकर एवं दिलराज कौर के साथ गंगा किनारे मोरा गाँव सिनेमा मे गाना गया है.

साहित्य

भोजपुर मे साहित्य परंपरा के एक लम्बी श्रंखला है – मुंशी सदासुख लाल, सैएद इशुतुल्लाह, लालू लाल, संदल मिश्र आदि खरी बोली के कुछ प्रमुख नाम है जो अपने कार्य के लिए प्रसिद्ध है. भारतेंदु काल के अखौरी येशोदानंद एक प्रसिद्ध संपादक रहे, श्री शिवनंदन सहाय एक जीवन चरित लेखक रहे, श्री जैनेन्द्र किशोर जैन एक प्रमुख साहित्यकार एवं नाट्य निर्देशक रहे. दिवेदी काल मे महामहोपाध्याय पंडित सकल नारायण शर्मा और पंडित रामदहिन मिश्र एक प्रसिद्ध लेखक  रहे. आचार्य शिव पूजन सहाय इसी क्षेत्र के प्रमुख कहानीकार , साहित्यकार, निबंधकार रहे. छायावाद काल मे श्री केदार नाथ मिश्र प्रभात, श्री राम दयाल पाण्डेय, कलेक्टर सिंह केशरी, श्री नन्द किशोर तिवारी, और श्री रामनाथ पाठक प्रसिद्ध कवि रहे. ये सारे वय्क्तित्वो ने मे अपने साहित्य रचना से इस क्षेत्र के लम्बी सेवा की है.

खेल

भोजपुर खेल के क्षेत्र मे बहुत तेजी से अग्रसर हो रहा है. जिला खेल संगठन यहाँ खेल को काफी बढ़ावा दे रही है. यह यहाँ खेल का बहुत अच्छा वातावरण बना रहा है, विभिन्न प्रकार के खेलो मे स्थानीय लोगों को बढ़ावा दे रहा है.

रमना मैदान के ठीक बीचो बीच एक भव्य स्टेडियम है – वीर कुअंर सिंह स्टेडियम . लोगों के बैठने के लिए सीमेंट की सुंदर सीढियाँ बनी हुई है. यहाँ विभिन्न प्रकार के खेलों का आयोजन होता रहता है. कवि सम्मेलन या इस प्रकार के आयोजन के लिए यह एकमात्र खुला मंच है.

व्यक्तित्व

अब्दुल बारी भोजपुर को महत्वपूर्ण नायक

अब्दुल बरी प्रोफेसर बारी के रूप में प्रचलित थे i गाँधी के बहुत बड़े भक्त थे और बिहार में भारतीय स्वंत्रता के आन्दोलन के प्रमुख नायक रहे उनके पिता कुर्बान अली एक पुलिस इंस्पेक्टर थे I उनका जन्म 21 जनवरी 1884 को भोजपुर के कोइलवर अंचल में हुआ ,वे बिहार में खिलाफत कमिटी के सयुंक्त सचिव भी चुने गये I 21 फ़रवरी 1921 को उन्होंने डॉ राजेंद्र प्रसाद के साथ चौक मस्जिद आरा में एक बहुत बड़ी भीड़ को संबोधित किया I

स्वराज पार्टी के बिहार शाखा में उनको सेक्रेटरी भी चुना गया हैं I स्वंत्रता भारत लीग , जिसका गठन 3 नवम्बर 1928 को पंडित जवाहर लाल नेहरु और सुभाष चन्द्र बोष के हांथो हुआ , उस में इनको सदस्य चुना गया I मोती लाल नेहरु के द्वारा अंग्रेजी में एक पेपर निकाला गया THE INDEPENDENCE ,उनके सम्पादन के साथ जुड़े रहे 1930 से 34 के बीच सविनय अवज्ञा आन्दोलन में डॉ० राजेंद्र प्रसाद से मिलकर कन्धा से कन्धा मिलाकर काम किया I

पंडित हरगोबिन्द मिश्रा :- भोजपुर का गौरव

शाहाबाद जिले में पंडित हरगोबिन्द मिश्रा बाबा के नाम से जाने जाते थे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के यह एक प्रमुख नेता थे इनका जन्म 1892 में शाहपुर के प्रसोंडा में हुआ था i अपने समय के तीन प्रमुख नेता बिशेश्वर सिंह, शालिग्राम सिंह (कुल्हड़िया), ज्वाला प्रसाद (बिहिया), से यह बहुत प्रभाबित थे I अपने स्कुल के दिनों से ही वे स्वदेसी आन्दोलन से काफी प्रभाबित थे I जब बिहार और उड़ीसा का 1912 में पादुर भाव हुआ तो उस समय वे सच्चीदानंद सिन्हा ने जो उस समय जिला स्कूल के छात्र थे, ने उन्हें काफी आन्दोलित किया 1912 में ही आर० एन० मुधोलकर के सभा पतित्व में वे राष्ट्रिये कांग्रेश के पटना अधिवेसन में पधारे I महत्मा गाँधी के चम्पारण सत्याग्रह (1917) उन्हें अन्दर से हिला दिया जो यूरोप के निल के खेतीहरो के खिलाफ छेड़ा गया था I 1919 में जलिया वाला बाग की घटना ने उनकी हिर्दय और आत्मा को बुरी तरह झकझोर दिया और वे अपने माता पिता के विरूद्ध जाकर पूर्णरूप से सत्याग्रह आन्दोलन में कूद पड़े I

 

हरनन्दन सिंह :- भारतीय स्वंत्रता संग्राम के एक नायक

भोजपुर में बाबु हरनन्दन सिंह वकील बाबु के नाम से प्रसिद्ध थे I उनका प्रमुख लक्ष्य था — किसी भी प्रकार देश के अंग्रेजो को गुलामी से मुक्त कराना कोइलवर के बाग़ मझौवा में शिव नारायण सिंह के घर उनका जन्म हुआ 1937 में आरा विधान सभा का नेतृत्व किया गाँधी जी के साथ मिलकर असहयोग आन्दोलन में उन्होंने ने बढ़ – चढ़कर काम किया I

जगजीवन राम – बाबु जी

जगजीवन राम बाबु जी के नाम से सुविख्यात थे I भारतीय स्वन्त्रता संग्राम में वे एक प्रमुख नायक रहे ,महान सांसद रहे एक आचे मंत्री बने I उनका जन्म आरा के चंदवा ग्राम में 05 अप्रैल 1908 को हुआ उन्होंने आठवी की शिक्षा महाजनी स्कूल आरा से 1922 में प्राप्त की उन्होंने फीर आरा के टाउन स्कूल में दाखिला ले लिया वे बहुत ही तीक्षण बुद्धि के छात्र रहे और इसलिए हर वर्ग में छात्रवृति भी पाते रहे I

पंडित जवाहर लाल नेहरु के नेतृतव में उन्होंने 1928 में कोलकाता एवं 1929 में लाहौर कांग्रेश अधिवेशन में भाग लिया सरकारी नौकरी को दर किनार क्र वे नमक सत्याग्रह आन्दोलन में कूद पड़े उन्हें आरा में बुद्धन राय वर्मा के साथ गिरफ्तार क्र लिया गया I

सपूर्ण भारत में बाबु जगजीवन राम की कोशिश रंग लाइ I आरा का महदेवा मन्दिर एवं ब्रहमपुर का शिव मन्दिर निम्न सोसित वर्ग के लिए भी खोल दिया गया I मार्च 1933 में आरा नगर निगम का नगर आयुक्त चूना गया I

1946 में पंडित जवाहर लाल नेहरु के सरकार ने सबसे नव जवान मंत्री के रूप में सपथ ली उन्हें श्रम मंत्रालय दिया गया I भारतीय सविधान के वे सदस्य रहे एवं सविधान में उन्होंने सामाजिक न्याय के लिए काम किया I 1977 से 1979 तक वे मोरारजी देसाई की सरकार में उप प्रधानमंत्री रहे I

स्व श्री राम सुभग सिंह

ये एक प्रमुख स्वंत्रता सेनानी रहे. स्वंत्रता संग्राम को इन्होने आम जनता तक पहुचाया . उन्हें सन १९४३ में जेल भेज दिया गया, जहाँ पुलिस के द्वारा बहुत प्रताड़ित किया गया.

स्व श्री जग्गनाथ सहाय 

ये आरा के भगवा गली के निवासी थे. ये जिला के प्रथम व्यक्ति थे जो १९०५ में तकनिकी शिक्षा के लिए जापान गए. वहां से वे टेक्सटाइल इंजिनियर बन कर १९०८ में लौटे.

स्व श्री काशीनाथ जी 

इस शख्स ने राज्य का पहला कपडे का मिल फुलवारी शरीफ में स्थापित किया . सन १९३६ में इस मिल का उद्घाटन पंडित जवाहर लाल नेहरु के हाथो हुआ.

स्व कवि  कैलाश 

घोरादेयी ग्राम में जन्मे स्व कवि  कैलाश एक महान स्वंत्रता सेनानी और शहीद  थे जिन्होंने 28  सितम्बर १९४२ आरा समाहरणालय पर   तिरंगा फहराया . बाद में आरा  समाहरणालय    तालाब के   पास बलूच पुलिस के द्वारा मार दिया गया .

स्व श्री वी पी सिंह 

वे सुप्रीम कोर्ट के प्रथम चीफ जस्टिस थे.

स्व श्री अम्बिका सरन सिंह 

वे एक प्रमुख स्वंत्रता सेनानी रहे और बाद में बिहार के राज्य मंत्री बने.

स्व बिन्देश्वरी दुबे 

ये बिहार के पूर्व मुख्य मंत्री रहे. बाद में इन्होने बिहार के राज्य मंत्री के रूप में भी सेवा दी .

स्व रामानंद तिवारी 

वे बिहार के गृह मंत्री थे.

स्व ए पी शर्मा 

वे प्रमुख राजनीतिज्ञ रहे जो भारत के रेल मंत्री बने .

स्व तपेश्वर सिंह 

वे बिहार में सहकारी आन्दोलन के संस्थापक थे.

स्व पदमश्री भारत मिश्र 

राजनीति विज्ञानं एवं साहित्य के वे जाने मने विद्वान रहे.

श्री एल एम् रॉय 

ये एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और लेखक थे जिन्होंने अनेको पुस्तके लिखी .

श्री  बशिष्ठ नारायण सिंह 

विश्व स्तर के ये प्रमुख गणितज्ञ है.