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भौगोलिक संरचना

प्राकृतिक प्रभाग

आधुनिक भोजपुर मे तीन सब डिविजन है – आरा, जगदीशपुर और पीरो। इसमे कुल 14 प्रखण्ड है जो कुल 237526 हेक्टयेर क्षेत्र मे फैले है । उत्तर मे गंगा नदी और दक्षिण मे पूर्वोत्तर रेल्वे के बीच फैला संपूर्ण भूभाग प्रति वर्ष गंगा के द्वारा लाये गए गाद से अति उपजाऊ है । वास्तव मे यह क्षेत्र संपूर्ण बिहार मे उत्तम गेहु फसल उत्पादन के लिए विख्यात है ।

ज़िला मे नदिया तीन तरफ से प्रवाहित होती है – उत्तर , पूर्व एवं कुछ दक्षिणी सीमा पर । गंगा ज़िला के उत्तरी सीमा से बहती है । उत्तर – पूर्व के नीची क्षेत्र की जमीन गंगा नदी से ही उपजाऊ बनी है । खेर नदी और बनास नदी गंगा मे मिलती है ।

सोन ज़िला की दूसरी प्रमुख नदी है । सोन बिहार मे पलामू (झारखंड), मिर्जापुर(ऊ0प्र0) एवं रोहतास(बिहार) की सीमा से प्रवेश करती है । यह भोजपुर के उत्तरी और पूर्वी सीमा से होकर बहती है और पटना ज़िला के मनेर के पास यह गंगा मे मिल जाती है ।

ज़िला संखियकी के रिपोर्ट के अनुसार – ज़िला मे कुल 1244 गाव है जिसमे से 993 आवासित है और 251 निर्जन है । ज़िला मे कुल 228 पंचायत , 12 राजस्व अंचल , 6 श्हर , 22 पुलिस थाना एवं 5 सब पुलिस थाना है ।

ज़िला मे एक प्रमुख डाकघर है जो आरा शहर मे अवस्थित है। यहाँ 41 सब पोस्ट ऑफिस, 3 विभागीय पोस्ट ऑफिस, 252 अतिरिक्त विभागीय पोस्ट ऑफिस है । कुल लगभग 989 गाँव इन पोस्ट ऑफिस से अक्षदीत है।

मौसम

ज़िला मे मौसम समशीतोषण है । गर्मी की शुरुआत मार्च महीने के लगभग मध्य से शुरू हो जाती है। उस समय पश्चिमी हवा संपूर्ण दिन बहती है। अप्रैल एवं मई माह मे अति गर्मी पड़ती है। समान्यतया मानसून का पदार्पण जून के तीसरे सप्ताह से शुरू हो जाता है और वर्षा सितम्बर के अंत तक या अक्टूबर के प्रारम्भ तक जारी रहती है । जाड़े का समय नवम्बर से शुरू हो जाता है औंर मार्च के प्रारम्भ तक जारी रहता है। जनवरी ज़िला का सबसे ठंडा मौसम है जिसमे तापमान लगभग 10 डिग्री तक गिर जाता है। अप्रैल माह से मानसून आने तक ज़िला मे भयंकर आंधी व तूफान भी आते है।

वर्षापात

वर्षा जून माह से शुरू हो जाती है, तापमान मे गिरावट आ जाती है एवं आर्द्रता बढ़ जाती है। ज़िला मे अधिकतम वर्षा जुलाई व अगस्त माह मे पायी गई है। समान्यतया इस माह मे औसत वर्षा 300 मि मि पायी गई है। पुरवा हवा जून से सितम्बर तक बहती है जिससे वर्षा होती है। अक्तूबर से हवा की दिशा बदल जाती है और पछुआ हवा मई तक बहती है। थोड़ी बहुत वर्षा अक्तूबर माह मे भी हो जाती है पर नवम्बर व दिसम्बर माह प्रायः सूखा सूखा रहता है। कुछ वर्षा शीत ऋतु मे भी जनवरी व फरवरी माह मे होती है ।

सिचाई सुविधा

सोन व गंगा नदी सिचाई के लिए मुख्य नदिया है । सिंचित भूमि का अधिकांशतः भाग इन्ही नदियो द्वारा सींचा जाता है। जमींदारी उन्मूलन के पूर्व जमींदार आहार और पईन का इस्तेमाल करते थे जिससे सिंचाई का भी काम लिया जाता था एवं जल निकासी का भी कार्य लिया जाता था। कुआं भी सिंचाई का अच्छा साधन था।

2001 मे ज़िला प्रशासन द्वारा प्रकाशित सांख्यिकी रिपोर्ट के अनुसार 15493 हेक्टर भूमि सोन नदी से सिंचित होती है। 14940 हेक्टर भूमि मध्य सोन नदी से सिंचित होती है। 18379 हेक्टर भूमि छोटी नहरों से सिंचित होती है। 2582 हेक्टर भूमि सरकारी बिजली टूबेवेल से सिंचित होती है। 2099 हेक्टर भूमि डीजल टूबेवेल से सिंचित होती है। व्यकितिगत बिजली टूबेवेल से कुल 8263 हेक्टर भूमि सिंचित होती है। 16999 हेक्टर भूमि व्यकितिगत डीजेल टूबेवेल से सिंचित होती है। 58586 हेक्टर भूमि अन्य साधनो द्वारा जैसे आहार, कुआं , तालाब , इत्यादि से सिंचित होती है। अर्थात कुल 237526 हेक्टर भूमि मे 177341 हेक्टर भूमि सिंचित है। इसका मतलब ज़िला मे कुल भूमि का 74.66% सिंचित है।

भूमि इस्तेमाल की रूपरेखा

इस ज़िला मे छोटी पहाड़ियो को छोड़ दे तो सिंचित और असिंचित सभी क्षेत्र मे खेती के लिए बर्बाद की जा रही है। यहाँ तक कि कुछ छोटे तालाब और झील भी , जो कि बतख पालन उपयुक्त थे, पानी सूखा कर बोरो की फसल उपजाई जा रही है। एक खेती की नई विधा ने जन्म लिया जिसे पैकेज प्रोग्राम कहते है । इस पैकेज प्रोग्राम से अंधाधुंध खेती की जा रही है। प्रखण्ड विकास अथॉरिटी भी अच्छी आउटपुट के लिए खेती को बढ़ावा दे रहे है । सोन नहर सिस्टम को और विकसित किया जा रहा है ताकि अतिरिक्त भूमि को खेती के अंतर्गत लाया जा सके ।

2001 मे ज़िला प्रशासन द्वारा प्रकाशित सांख्यिकी रिपोर्ट के अनुसार इस ज़िला मे विभिन्न प्रकार के फसल उगाए जाते है । धान – 105155 हेक्टर मे, गेहु – 67259 हेक्टर मे, मक्का _ 2779 हेक्टर मे, जौ – 1154 हेक्टर मे, चना – 5.017 हेक्टर मे, मटर – 2016 हेक्टर मे, रहर – 919 हेक्टर मे, मसूर – 8115 हेक्टर मे, खेसारी – 8989 हेक्टर मे, सरसों – 2886 हेक्टर मे, मसाले – 31 हेक्टर मे, सब्जी – 5119 हेक्टर मे, फल – 2651 हेक्टर मे, और ईख – 209 हेक्टर मे उगाये जाते है ।

इस रिपोर्ट मे उपज की दर भी प्रकाशित की गई है जो ज़िला प्रशासन को राज्य सरकार से उपलब्ध कराई गई है। इसके अनुसार विभिन्न फसलों के उपज की दर निम्न प्रकार है :-

धान(सबसे अधिक उपज वाला फसल) – 3502 कि0ग्र0/ हेक्टर, धान(स्थानीय सिंचन मे) – 3330 कि0ग्र0/ हेक्टर, गेहु (सिंचित क्षेत्र) – 2725 कि0ग्र0/ हेक्टर, गेहु (असिंचित क्षेत्र) – 2707 कि0ग्र0/ हेक्टर, मसूर – 1047 कि0ग्र0/ हेक्टर, खेसारी – 986 कि0ग्र0/ हेक्टर, सरसों – 679 कि0ग्र0/ हेक्टर, चना – 937 कि0ग्र0/ हेक्टर ।

औद्योगिकीकरण

शाहाबाद के विखंडन के बाद जब भोजपुर और रोहतास का निर्माण हुआ तो अधिकतम बड़े उद्योग रोहतास मे चले गए। बस कुछ छोटे उद्योग और कृषि आधारित कुछ उद्योग भोजपुर मे रह गए ।

ज़िला सांख्यकी रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 1992 और अगस्त 2000 मे 1085 लघु एवं गृह उद्योग जिला उद्योग केंद्र के अंतर्गत रजिस्टर्ड हुए . कुल मिलाकर 869.19 लाख रुपए इन उद्योगों मे लगे और कुल 1858 लोगों को इन उद्यगों मे रोजगार मिला. कोइलवर प्रखंड के अंतर्गत गिद्धा मे एक औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया गया है जो 30-40 एकड़ मे फैला है और यह पटना औद्योगिक विकास प्राधिकार के अंतर्गत रजिस्टर्ड है . इंडेन गैस एजेंसी का एक बॉटलिंग प्लांट भी इसी क्षेत्र मे है. किसी भी उद्योग का विकास वहां के बिजली की अनवरत सप्प्लाई पर निर्भर करता है, लेकिन इस जिला मे जरुरत से बहुत कम बिजली की सप्प्लाई होती है. जिला के औद्योगिकीकरण मे यह एक बहुत बड़ी बाधा है.

खान और खनिज

खदान और खनिज भोजपुर जिला मे बहुत कम है. केवल एक ही खनिज इस जिला मे पाया जाता है, वह है सोन नदी का बालू . भोजपुर जिला मे सोन का विस्तार पूर्व से दक्षिण तक लगभग 40 किलोमीटर के विस्तार मे है. लेकिन केवल कोइलवर से ही लगभग 5 किलोमीटर क्षेत्र मे से बालू का उठाव होता है. लगभग 35 किलोमीटर क्षेत्र बालू उठाव के लिए विकसित नहीं किया गया है.